हसरते दिल ....लहू लुहान बाकी है .....
सब्र का एक और इम्तिहान बाकी है .....
टूटे फूटे ही सही इन कांच के प्यालों मे
बूँद भर ही सही कुछ तो जान बाकी है ....
अभी तो खुले होंगे मैकदों के दरवाजे ....
अभी तो होनी सुबह की आजान बाकी है .....
हसरते दिल .... लहू लुहान बाकी है .....
कौन कहता है कि मेरा कोई सरपरस्त नही
अभी तो मेरे सर पे आसमान बाकी है.....
कह दो इन आकाश के उड़ते परिंदों से
अभी तो मेरी असली उड़न बाकी है
हसरते दिल .... लहू लुहान बाकी है .....
सब्र का एक और इम्तिहान बाकी है .....
टूटे फूटे ही सही इन कांच के प्यालों मे
बूँद भर ही सही कुछ तो जान बाकी है ....
अभी तो खुले होंगे मैकदों के दरवाजे ....
अभी तो होनी सुबह की आजान बाकी है .....
हसरते दिल .... लहू लुहान बाकी है .....
कौन कहता है कि मेरा कोई सरपरस्त नही
अभी तो मेरे सर पे आसमान बाकी है.....
कह दो इन आकाश के उड़ते परिंदों से
अभी तो मेरी असली उड़न बाकी है
हसरते दिल .... लहू लुहान बाकी है .....