अकेले ही चले जायेंगे हम इस जहान से
अब कोई मतलब नहीं रहा किसी से
लो मुह फेर लिया हम ने भी इस संसार से
देखे हैं हम ने भी मतलबी इन्सान यहाँ
पर कभी ना कहलाये थे मतलबी हम
मतलबी जो कह दिया उन्होंने हमे
दर्द उमड़ा दिल कि हर दिवार से
हर चीज़ अब हमे बेमानी सी लगती है
हर राह हर गली अनजानी सी लगती है
चाहता हूँ जिन्हें दिलो जान से
वक़्त ने दे दिये उन्हें चहरे अंजान से
वक़्त ही घाव है हमारा
वक़्त ही मरहम होगा
देखते हैं हम भी अब वक़्त का आसरा
ना जाने कब तक ये वक़्त बेरहम होगा
आज जो हम ने था उनसे मुह फेरा
और दे दी उन्होंने ,पीछे न मुड़ने कि कसम
लो हम भी हो गए मतलब कि भीड़ मे शामिल
और खो गये इस अँधेरे में हम
अब मतलबी कहलाने से हमे कोई इन्कार नहीं
मतलबी ,मतलबी ही होता है सिर्फ
मतलबी होता, मक्कार नहीं
मुह जो फेर लिया उन्होंने हम से
अब हमे भी किसी का सरोकार नहीं
ना जाने क्यूँ .....
मतलबी कहलाने से हमे भी कोई इन्कार नहीं
जाने क्यूँ ......

