Monday, May 31, 2010

पर मतलब परस्त दुनिया में हम भी मतलबी कहलाते रहेंगे




अकेले  ही  आये थे हम इस जहान में  
अकेले ही चले जायेंगे हम इस जहान से 
अब कोई मतलब नहीं रहा किसी से 
लो मुह फेर लिया हम ने भी इस संसार से 

देखे हैं  हम ने भी मतलबी इन्सान  यहाँ 
पर कभी  ना कहलाये थे मतलबी हम 
मतलबी जो कह दिया उन्होंने हमे 
दर्द उमड़ा दिल कि हर दिवार से 

हर चीज़ अब हमे बेमानी सी लगती है 
हर राह हर गली अनजानी सी लगती है
चाहता हूँ जिन्हें  दिलो जान से
वक़्त ने दे दिये उन्हें चहरे अंजान से

वक़्त ही घाव है हमारा 
वक़्त ही मरहम होगा 
देखते हैं हम भी अब वक़्त का आसरा 
ना जाने कब तक ये वक़्त बेरहम होगा 

आज जो हम ने  था उनसे मुह फेरा
और दे दी उन्होंने ,पीछे न मुड़ने कि कसम 
लो हम भी हो गए मतलब कि भीड़ मे शामिल 
और खो गये इस अँधेरे में हम 

अब मतलबी कहलाने से हमे कोई इन्कार नहीं
मतलबी ,मतलबी ही  होता है सिर्फ 
मतलबी होता, मक्कार नहीं
मुह जो फेर लिया उन्होंने हम से
अब हमे  भी किसी का सरोकार  नहीं

ना जाने क्यूँ .....
मतलबी कहलाने से हमे  भी कोई इन्कार नहीं
जाने क्यूँ  ......
मतलबी कहलाने से हमे  भी कोई इन्कार नहीं

आज़ाद पंछी थे हम
आज़ाद पंछी ही रहेंगे
मतलबी ना थे हम कभी और नहीं कभी मतलबी रहेंगे

पर मतलब परस्त दुनिया में हम भी  मतलबी कहलाते रहेंगे
पर मतलब परस्त दुनिया में हम भी  मतलबी कहलाते रहेंगे 




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