तेरे ख्याल से दीवाने बाज़ आ न सके
गए वहां तक जहाँ ख्याल आ न सके
मुझ को जब चैन से सोने न दिया दुनिया ने
कब्र मे जा के सोया की कोई जगा न सके
Sunday, May 17, 2009
Friday, May 15, 2009
आधुनिक नारी
जो सजाया गया रूप को इस तरह
क्या नुमाइश का ये कोई सामान है
रूप का गर्व क्या दो दिनों के लिए
रूप तो एक रंगीन मेहमान है
ये तो कहना तुम्हारा निराधार है
एक भोंरा कलि को सताया करे
ये सुनहली सुनहली लटें खोल कर
दे निमंत्रण समां तो शलभ क्या करे
नय्लोनी अदा रेशमी बांकपन
ये लिपिस्टिक है या आबरू का लहू
आ गई है यहाँ पश्चमी ये हवा
तुम उडी जा रही हो पवन की तरह
भाइयों की कमी न खलेगी तुम्हे
पहले चलना तो सीखो बहन की तरह
जो सजाया गया रूप को इस तरह
क्या नुमाइश का ये कोई सामान है
क्या नुमाइश का ये कोई सामान है
रूप का गर्व क्या दो दिनों के लिए
रूप तो एक रंगीन मेहमान है
ये तो कहना तुम्हारा निराधार है
एक भोंरा कलि को सताया करे
ये सुनहली सुनहली लटें खोल कर
दे निमंत्रण समां तो शलभ क्या करे
नय्लोनी अदा रेशमी बांकपन
ये लिपिस्टिक है या आबरू का लहू
आ गई है यहाँ पश्चमी ये हवा
तुम उडी जा रही हो पवन की तरह
भाइयों की कमी न खलेगी तुम्हे
पहले चलना तो सीखो बहन की तरह
जो सजाया गया रूप को इस तरह
क्या नुमाइश का ये कोई सामान है
Wednesday, May 13, 2009
हसरत ऐ दिल ....लहू लुहान बाकी है .....
हसरते दिल ....लहू लुहान बाकी है .....
सब्र का एक और इम्तिहान बाकी है .....
टूटे फूटे ही सही इन कांच के प्यालों मे
बूँद भर ही सही कुछ तो जान बाकी है ....
अभी तो खुले होंगे मैकदों के दरवाजे ....
अभी तो होनी सुबह की आजान बाकी है .....
हसरते दिल .... लहू लुहान बाकी है .....
कौन कहता है कि मेरा कोई सरपरस्त नही
अभी तो मेरे सर पे आसमान बाकी है.....
कह दो इन आकाश के उड़ते परिंदों से
अभी तो मेरी असली उड़न बाकी है
हसरते दिल .... लहू लुहान बाकी है .....
सब्र का एक और इम्तिहान बाकी है .....
टूटे फूटे ही सही इन कांच के प्यालों मे
बूँद भर ही सही कुछ तो जान बाकी है ....
अभी तो खुले होंगे मैकदों के दरवाजे ....
अभी तो होनी सुबह की आजान बाकी है .....
हसरते दिल .... लहू लुहान बाकी है .....
कौन कहता है कि मेरा कोई सरपरस्त नही
अभी तो मेरे सर पे आसमान बाकी है.....
कह दो इन आकाश के उड़ते परिंदों से
अभी तो मेरी असली उड़न बाकी है
हसरते दिल .... लहू लुहान बाकी है .....
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