जो सजाया गया रूप को इस तरह
क्या नुमाइश का ये कोई सामान है
रूप का गर्व क्या दो दिनों के लिए
रूप तो एक रंगीन मेहमान है
ये तो कहना तुम्हारा निराधार है
एक भोंरा कलि को सताया करे
ये सुनहली सुनहली लटें खोल कर
दे निमंत्रण समां तो शलभ क्या करे
नय्लोनी अदा रेशमी बांकपन
ये लिपिस्टिक है या आबरू का लहू
आ गई है यहाँ पश्चमी ये हवा
तुम उडी जा रही हो पवन की तरह
भाइयों की कमी न खलेगी तुम्हे
पहले चलना तो सीखो बहन की तरह
जो सजाया गया रूप को इस तरह
क्या नुमाइश का ये कोई सामान है
interesting............gud...[:)]
ReplyDeleteआदत तो तुम्हे भी है इन्ही रेशमी लटों की ....
ReplyDeleteदेखते तो तुम भी हो चमक इसी लिपिस्टिक की ...
तो क्या परहेज है तुम्हे इस पश्चिमी हवा से ...
तो उडान भर तो तुम भी इस शाम की ..
आदत तो तुम्हे भी है इन्ही रेशमी लटों की ....
ReplyDeleteदेखते तो तुम भी हो चमक इसी लिपिस्टिक की ...
तो क्या परहेज है तुम्हे इस पश्चिमी हवा से ...
तो उडान भर तो तुम भी इस शाम की ....