Friday, May 15, 2009

आधुनिक नारी

जो सजाया गया रूप को इस तरह
क्या नुमाइश का ये कोई सामान है

रूप का गर्व क्या दो दिनों के लिए
रूप तो एक रंगीन मेहमान है

ये तो कहना तुम्हारा निराधार है
एक भोंरा कलि को सताया करे

ये सुनहली सुनहली लटें खोल कर
दे निमंत्रण समां तो शलभ क्या करे

नय्लोनी अदा रेशमी बांकपन
ये लिपिस्टिक है या आबरू का लहू

आ गई है यहाँ पश्चमी ये हवा
तुम उडी जा रही हो पवन की तरह

भाइयों की कमी न खलेगी तुम्हे
पहले चलना तो सीखो बहन की तरह

जो सजाया गया रूप को इस तरह
क्या नुमाइश का ये कोई सामान है

3 comments:

  1. interesting............gud...[:)]

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  2. आदत तो तुम्हे भी है इन्ही रेशमी लटों की ....
    देखते तो तुम भी हो चमक इसी लिपिस्टिक की ...
    तो क्या परहेज है तुम्हे इस पश्चिमी हवा से ...
    तो उडान भर तो तुम भी इस शाम की ..

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  3. आदत तो तुम्हे भी है इन्ही रेशमी लटों की ....
    देखते तो तुम भी हो चमक इसी लिपिस्टिक की ...
    तो क्या परहेज है तुम्हे इस पश्चिमी हवा से ...
    तो उडान भर तो तुम भी इस शाम की ....

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