Thursday, June 3, 2010

मेरी मिटटी से भी खुश्बू ,मोहब्बत की आएगी

मेरी मिटटी से भी खुश्बू ,मोहब्बत की आएगी
मेरी मोहब्बत , यूँ ही नहीं भुलायी  जाएगी 
 सागर की  गहराई क्या नापेगी इसे 
ये तो पर्वतों से भी कहीं ज्यादा ऊंचाई पायेगी
मेरी मिटटी से भी खुश्बू ,मोहब्बत की आएगी

बन के खुश्बू ,यूँ महक जाऊँगा मैं
हर जिस्म हर सांस मे, यूँ खो जाऊँगा मैं
जुदा तुझको ,मुझसे कौन कर सकेगा भला 
के मर कर भी ,यूँ अमर हो जाऊँगा मै

मोहब्बत की खुश्बू मे ,अमरता को यूँ पाऊँगा
एक क्या, कई जिश्मों मे समा जाऊँगा  मैं 
गुजरूँगा ,जिस राह से खुश्बू बनकर
मोहब्बत ही मोहब्बत महका जाऊँगा मैं

यूँ मेरी मिट्टी से खुश्बू मोहब्बत की  आएगी
तुम ही बताओ क्या ये, यूँ ही भुला दी जाएगी
सागर की  गहराई क्या नापेगी इसे 
ये तो पर्वतों से भी ,कहीं ज्यादा ऊंचाई पायेगी 

मेरी मिटटी से भी खुश्बू ,मोहब्बत की आएगी

Monday, May 31, 2010

पर मतलब परस्त दुनिया में हम भी मतलबी कहलाते रहेंगे




अकेले  ही  आये थे हम इस जहान में  
अकेले ही चले जायेंगे हम इस जहान से 
अब कोई मतलब नहीं रहा किसी से 
लो मुह फेर लिया हम ने भी इस संसार से 

देखे हैं  हम ने भी मतलबी इन्सान  यहाँ 
पर कभी  ना कहलाये थे मतलबी हम 
मतलबी जो कह दिया उन्होंने हमे 
दर्द उमड़ा दिल कि हर दिवार से 

हर चीज़ अब हमे बेमानी सी लगती है 
हर राह हर गली अनजानी सी लगती है
चाहता हूँ जिन्हें  दिलो जान से
वक़्त ने दे दिये उन्हें चहरे अंजान से

वक़्त ही घाव है हमारा 
वक़्त ही मरहम होगा 
देखते हैं हम भी अब वक़्त का आसरा 
ना जाने कब तक ये वक़्त बेरहम होगा 

आज जो हम ने  था उनसे मुह फेरा
और दे दी उन्होंने ,पीछे न मुड़ने कि कसम 
लो हम भी हो गए मतलब कि भीड़ मे शामिल 
और खो गये इस अँधेरे में हम 

अब मतलबी कहलाने से हमे कोई इन्कार नहीं
मतलबी ,मतलबी ही  होता है सिर्फ 
मतलबी होता, मक्कार नहीं
मुह जो फेर लिया उन्होंने हम से
अब हमे  भी किसी का सरोकार  नहीं

ना जाने क्यूँ .....
मतलबी कहलाने से हमे  भी कोई इन्कार नहीं
जाने क्यूँ  ......
मतलबी कहलाने से हमे  भी कोई इन्कार नहीं

आज़ाद पंछी थे हम
आज़ाद पंछी ही रहेंगे
मतलबी ना थे हम कभी और नहीं कभी मतलबी रहेंगे

पर मतलब परस्त दुनिया में हम भी  मतलबी कहलाते रहेंगे
पर मतलब परस्त दुनिया में हम भी  मतलबी कहलाते रहेंगे 




Sunday, May 30, 2010

" पश्चाताप "

अपनी ही नज़र मे गिर गया हूँ इस कदर
लगता है अब न शायद उठ पाऊँगा
खुद को ही माफ़ नहीं कर पा रहा हूँ
दूसरा क्या मुझे माफ़ कर पायेगा

भूल वो हो गयी है मुझ से भूल से 
भूलना चाहूँ भी तो नहीं भूल पाऊँगा
अच्छा सबक दिया है ऐ जिंदगी तू ने
 खुशियाँ दी तो, गम भी दिये तू ने
पाठ वो पढाया जो न भूल पाऊँगा

पास जिस को चाहता हूँ अपने  हर पल  में
उस के दूर जाने का ख्याल भी न ला पाऊँगा  
 अनजाने मे इतनी चोट दी है खुद को
 सोचता हूँ ये घाव कैसे, मैं भर पाऊँगा

नाजुक होते हैं ये दिल के  रिश्ते सभी
सोचा न था कि तेरी बेरूखी मे ये भी सीख जाऊँगा

मुझको अगर कोई उठा सकता है,मेरी नज़रों मे
तो वो तुम हो,तुम ही हो , सिर्फ तुम
उठा लो मुझे इस दर्द के दरिया से
वरना बिन मौत के ही मर जाऊँगा
होगा यूँ जिंदगी का सामना मुझसे
पता  नहीं था कि मौत मे जिंदगी पाऊँगा


 

Saturday, May 22, 2010

एक दिन यूँ जल जाऊँ मैं ….

एक  दिन  यूँ   जल  जाऊँ  मै ….
आरजू  है  तुझ मे मिल  जाऊँ मै ....
और...फिर .......
 तुझको   याद  आऊँ  मै  …
आंसुओं  की तलाश हो जो तुझे कभी ….
तेरे होंठों की हँसी बन के मुस्कुराऊँ मैं.....
एक  दिन  यूँ   जल  जाऊँ मैं   ….
इन हवाओं मे यूँ  मिल जाऊं मैं ....
साँस ले तू तो ....
तेरे दिल मे धड़क जाऊं मैं...
एक  दिन  यूँ   जल  जाऊँ मैं   …
छूना जो चाहे तू आसमान ..
तेरे कदमों की जमीं बन जाऊं मैं..
एक  दिन  यूँ   जल  जाऊँ मैं …
गर कोई ना हो दूर तक तेरे
शून्य  बन के तुझ पे छा जाऊं  मैं ...
एक  दिन  यूँ   जल  जाऊँ मैं   …
उजाले मिल सके जीवन मे तुझको..
इस आरजू मे आग बनकर जलूं  मैं...
एक  दिन  यूँ   जल  जाऊँ मैं   …
अपने  जलने का सही सबब पाऊँ मैं ....
एक  दिन  यूँ   जल  जाऊँ मैं   ….